ओ मेरे हमनवा

By | July 13, 2021

इस कदर दूर ना जा तू मुझसे
तेरे जाने से कुछ बेचैन सी हो उठती हूँ
यूँ मुझे अनदेखा ना किया कर
तेरे चले जाने के बाद मन ही मन मैं बहुत बिलखती हूँ

सच में……
इस डोर के टूट जाने पर मैं इसे बांधना पसंद करती हूँ
तेरे मुझसे दूर चले जाने पर मैं
तेरे दिल के और करीब बस जाना चाहती हूँ

या कुछ यूँ कहें कि
गर तू धरती है,तो मैं उसमें ही समा जाना चाहती हूँ
और अगर तू आसमाँ है
तो उस नीले आसमान की वजह बनना चाहती हूँ

ओ मेरे हमनवा
काश कुछ ऐसा हो कि
तू हवा हो…और मैं उसको महसूस कर पाऊं
या फिर तू समंदर हो…तो मैं उसकी गहराई बन जाऊं
तू आवाज़ हो तो मैं कोयल बन जाऊं
और गर तू कोयला हो
तो मैं उससे तराशा गया हीरा बन जाऊं
तू हिमालय हो तो मैं तेरे इश्क़ की डोर से बंधकर तुझमें ही बह जाऊँ
और तुझसे पिघलकर तुझी से मिल जाऊँ…तुझमें घूमकर तुझी में थम जाऊँ
ओर अगर तू पत्थर हो
तो मैं संगमरमरबन जाऊँ
उस खुशमिज़ाज़ आशिक़ की
अज़ीज़ खुशी बनना चाहती हूँ मैं
मोहब्बत की उस डोर को जोड़कर
सदा तेरे इश्क़ में बन्धना चाहती हूँ मैं।

BY SHREYA SHUKLA

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4 thoughts on “ओ मेरे हमनवा

  1. Avatar of Rajesh dwivediRajesh dwivedi

    Kya line h. So cute melodious. Fuu of devotion and sacrifice

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