Sunday, October 17, 2021
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Hindi Blogक्या अभी भी तुम सामाजिक पिंजड़े में कैद हो

क्या अभी भी तुम सामाजिक पिंजड़े में कैद हो

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BY SHREYA SHUKLA

क्या किया है कभी तुमने खुद से प्यार ,या फ़िर तुम भी किसी प्यसि के प्यार में विलीन हो ?

क्या खोलकर उन पंखों को कभी भरी है वो उड़ान तुमने ,

या फ़िर तुम अभी भी उस सामाजिक पिंजड़े में कैद हो ?

क्या किया है कभी तुमने खुदपर विश्वास ,

या फ़िर अभी भी तुम सबूतों को जोड़ते हुए भटक रहे हो ?

क्या किया है कभी तुमने उन चार लोगों को नजरअंदाज ,

या फ़िर अभी भी उनके मत तुम्हारी ज़िन्दगी बदल दिया करते हैं ?

क्या बन चुके हो तुम आत्मनिर्भर ,

या फ़िर अभी भी तुम लोगों की मान्यता पर निर्भर हो ?

क्या बनाया है तुमने कभी स्वयं अपना ही मार्ग ,

या फिर सदियों पहले निर्मित रास्ते पर चल रहे हो ?

क्या लगाई है तुमने कभी उन असफलताओं से गुज़रकर मिलने वाली सफलता की आस ,

या फिर अभी भी असफलता पाकर हो रहे हो तुम निराश ?

क्या निकले हो तुम कभी खुदके कहने पर ढूढ़ने उस अनजान मंज़िल को, 

या फ़िर तुम भी उसी भीड़ में से हो जिसकी अभी भी अनजान है वो मंज़िल ?

क्या देखे हैं कभी तुमने वो सपने जो सोने नहीं देते तुम्हें ,

या फ़िर अभी भी उस गहरी नींद में उन सपनों को देखते हुए हो जाते हो तुम मदहोश ?


*यदि हम थर्ड जेंडर है तो फ़र्स्ट कौन?*

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