दहेज प्रथा पाप है

By | July 11, 2021

BY SHREYA SHUKLA

कितने अरमानों से ढूँढता है वो बेटी को नया आशियाना
फिर क्यों उस आशियाने के लिए चुकाना पड़ता है उसे इतना बड़ा कर्ज़ाना
क्या खुश नहीं एक बेटी लेकर
जो सफ़ारी की उम्मीद सजाए बैठे हो
क्या इतना सस्ता है तुम्हारा वो बेटा
जिसे तुम बीस लाख के मोल बेचने बैठे हो…..
दस सफ़ारियों के बदले भी वो रौनक नहीं दे सकता तुमहें
एक बाप घर की चिंगारी को यूँ विदा नहीं कर सकता तुम्हें।

एक बेटी की पुकार सुनिएगा…….
याद हैं बाबा के वो आँसू मेरे होने पर
सोचते होंगे चुकाना पड़ेगा ता-उम्र की कमाई
बेटी की शादी होने पर
मेरे होने की खुशी से ज़्यादा ग़म शायद इस बात का होगा
कि मेरा और उनका साथ कुछ पच्चीस साल का होगा।
25 साल बाद…….
चली जाएगी वो अपना नया घर बसाने
और उसकी यादों में तड़पते रहेंगे हम बैठे बेचारे बेसहारे।
कभी सोचा है….
एक बाप का घर उजाड़ने पर तुम्हारा घर कैसे बसेगा
एक बेटी का चूल्हा बुझाने पर उस बहु का चूल्हा कैसे जलेगा।

वक़्त का खेल देखिएगा….
जिसने बहु बनने पर अपना घर गिरवी रखते देखा हो
कैसे सास बनने पर दूसरों का सर्वस्व गिरवी रखवाती है।
जिसने घुटघुट कर माँ बाप का रोना देखा हो
वही बेटी खरीदकर दूसरों को रोता देख खड़े खड़े मुस्काती है।

दहेज प्रथा पाप है……
कानून तो बना दिया
जब खरीदते हो तुम खुद वो बेटी
तो इसका पाठ तुमने ख़ाक दुनिया को सिखा दिया
इसका पाठ तुमने ख़ाक दुनिया को सिखा दिया।

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published.