- Advertisement -
Mental Healthबड़े शहरों का शोर

बड़े शहरों का शोर

बड़े शहर का शोर अक्सर हमें खुद से मिला देता है
शोर तो बहुत है लेकिन फिर भी हमें चुप्पी का एहसास दिला देता है
रहते तो हैं हम बहुत भीड़ से घिरे हुए
लेकिन उस भीड़ में भी हमें अकेलेपन का एहसास करा देता है
बड़े शहर का शोर अक्सर हमें खुद से मिला देता है

बड़े शहरों का उत्साह हमें भटका भी देता है
मंज़िल तो तय है लेकिन फ़िर भी रास्ता गलत दर्शा देता है
नैतिकता का पाठ सिखाते सिखाते अक्सर अनैतिकता की ओर चला देता है
बड़े शहरों का उत्साह हमें भटकाता चला जाता है

बड़े शहरों का तकनीकी ज्ञान अंदर नई सोच जगाता है
नवाचार के पथ पर चलते चलते भ्रष्टाचार की ओर चला जाता है
तकनीक सीखने के चक्कर में अक्सर ग़लत कृत्य भी करवा जाता है
और तकनीकी अपनाने की होड़ में अक्सर परिवार में दरार पैदा कर जाता है।
शहर का तकनीकी ज्ञान अंदर नई सोच जगाता है

बड़े शहरों का शोर अक्सर भावनात्मकता विस्मरण करवाता है
प्रतिस्पर्धा सिखाते सिखाते मानवता को पीछे छोड़ जाता है
लक्ष्य प्राप्त करवाते करवाते अक्सर पारिवारिकता छोड़ जाता है
की चुप्पी भरे इस शोर में सामाजिकता को भी भूल जाता है
बड़े शहरों का शोर अक्सर भावनात्मकता विस्मरण करा जाता है

By Shreya Shukla

यह भी पढ़ें

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Subscribe Today

GET EXCLUSIVE FULL ACCESS TO PREMIUM CONTENT

SUPPORT NONPROFIT JOURNALISM

EXPERT ANALYSIS OF AND EMERGING TRENDS IN CHILD WELFARE AND JUVENILE JUSTICE

TOPICAL VIDEO WEBINARS

Get unlimited access to our EXCLUSIVE Content and our archive of subscriber stories.

Exclusive content

- Advertisement -

Latest article

More article

- Advertisement -
%d bloggers like this: