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Shreya Shukla

Poetries

कभी खुदसे प्यार करके देखना

दूसरों की तलाश मेयह कहाँ आ गए हमदूसरों में ज़िन्दगी ढूढ़ते ढूढ़तेक्यों खुद ग़ुमशुदा से हो गए हमवो ख्वाहिश कुछ कर दिखाने कीवह ख्वाहिश कुछ लम्हें बिताने कीवो ख्वाहिश दूसरों कि खुशी कीवह ख्वाहिश उन मासूम पलों कीउस जवानी को ढूढ़ते ढूढ़तेक्यों मासूमियत से बिछड़ गए हमउन चार लोगो की ख़ुशी की खातिरक्यों कभी खुद […]Read More

Poetries

एक लालसा शोहरत की

दौलत लालसा में यह कहाँ आ गए हमशोहरत लालसा में क्यों खुद गुमशुदा से हो गए हम वो लालच कुछ कर दिखाने कावह लालच चंद पैसे कमाने कावो लालच जग दर्शन करने कावह लालच नाम रोशन करने का पैसों के पीछे भागते भागतेक्यों अपनों से बिछड़ गए हमक्यों कुछ भ्रष्ट आचरण के चलतेस्वाचरण को ही […]Read More

Mental Health Poetries

बड़े शहरों का शोर

बड़े शहर का शोर अक्सर हमें खुद से मिला देता हैशोर तो बहुत है लेकिन फिर भी हमें चुप्पी का एहसास दिला देता हैरहते तो हैं हम बहुत भीड़ से घिरे हुएलेकिन उस भीड़ में भी हमें अकेलेपन का एहसास करा देता हैबड़े शहर का शोर अक्सर हमें खुद से मिला देता है बड़े शहरों […]Read More

Poetries Whatsapp

ओ मेरे हमनवा

इस कदर दूर ना जा तू मुझसेतेरे जाने से कुछ बेचैन सी हो उठती हूँयूँ मुझे अनदेखा ना किया करतेरे चले जाने के बाद मन ही मन मैं बहुत बिलखती हूँ सच में……इस डोर के टूट जाने पर मैं इसे बांधना पसंद करती हूँतेरे मुझसे दूर चले जाने पर मैंतेरे दिल के और करीब बस […]Read More

Poetries

ज़िंदगी के कुछ टेढ़े मोड़

कभी-कभी ज़िंदगी एक ऐसा मोड़ लेती है जिसमें हर दिशा जाने में मंज़िल सिर्फ एक ही मिलती है क्यों एक वक्त हमें अकेले ही लड़ना होता है क्यों लोगों के साथ के बावज़ूद कई दफ़ा खुद को अकेला पाना होता है यूं रूठ ना तू मुझसे ज़िंदगी वरना तेरे रूठते रूठते कहीं मैं तुझसे ना […]Read More

Blog Social issue

Equal world with equal opportunities

By SHREYA SHUKLAThe story is all about Daniel Mendonca, a proud intersex who represents LGBTIQ in the United States, and speaks in different TED X events. Intersex people are individuals born with any of several variations in sex characteristics including chromosomes, gonads, sex hormones or genitals that do not fit the typical definitions for male […]Read More

Hindi Blog Poetries

दहेज प्रथा पाप है

BY SHREYA SHUKLA कितने अरमानों से ढूँढता है वो बेटी को नया आशियानाफिर क्यों उस आशियाने के लिए चुकाना पड़ता है उसे इतना बड़ा कर्ज़ानाक्या खुश नहीं एक बेटी लेकरजो सफ़ारी की उम्मीद सजाए बैठे होक्या इतना सस्ता है तुम्हारा वो बेटाजिसे तुम बीस लाख के मोल बेचने बैठे हो…..दस सफ़ारियों के बदले भी वो […]Read More

Poetries

वास्तव में सही है कौन?

BY SHREYA SHUKLA ज़िन्दगी दो तरीके से जी जाती हैपरिवार या हम!सही कौन है?वह जो खुद के लिए जीता है या वह जो परिवार के लिए मरता है?वो जो सबसे ऊपर खुदको रखता है या वह जो खुद से ऊपर परिवार को रखता है?वह जो खुद की नज़रों में इज़्ज़त बढ़ाता हैया फिर वह जिसके […]Read More

Hindi Blog Social issue

स्त्री और पुरूष एक ही सिक्के के दो पहलू हैं?

By Shreya Shukla स्त्री और पुरुष एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जिनके विकास की बात एक के बिना करना मिथ्या सिद्ध होगा|लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि ज़िन्दगी के दोनों पहियों को बराबर लाने के लिए कोई कदम उठाए जाते हैं तो एक पहिया अपने अहंकार को बरतते हुए चलना ही क्यों […]Read More

Hindi Blog Poetries

क्या अभी भी तुम सामाजिक पिंजड़े में कैद हो

BY SHREYA SHUKLA क्या किया है कभी तुमने खुद से प्यार ,या फ़िर तुम भी किसी प्यसि के प्यार में विलीन हो ? क्या खोलकर उन पंखों को कभी भरी है वो उड़ान तुमने , या फ़िर तुम अभी भी उस सामाजिक पिंजड़े में कैद हो ? क्या किया है कभी तुमने खुदपर विश्वास , या फ़िर अभी भी तुम […]Read More