Monday, January 17, 2022
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मौसम पूर्वानुमान प्रणाली : लेह में डॉप्लर रडार स्थापित, अब सटीक मिलेगी जानकारी – news 2022


अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 15 Jan 2022 12:59 AM IST

सार

केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करने के लिए ड्रोन आधारित तकनीकी का होगा इस्तेमाल।
 

डॉप्लर रडार(फाइल)
– फोटो : अमर उजाला

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लद्दाख के लेह समेत देशभर के चार स्थानों पर डॉपलर मौसम रडार शुक्रवार को राष्ट्र को समर्पित किए गए। केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने लेह, दिल्ली, मुंबई व चेन्नई में स्थापित इन रडार का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत ने दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों में मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करने के लिए एशियाई महाद्वीप में अग्रणी भूमिका निभाई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के 147वें स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि 2016 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई देशों को उपलब्ध कराई जा रही मौसम की गंभीर चेतावनी की जानकारी ने एक लंबा सफ र तय किया है। गंभीर जलवायु आपदाओं से लड़ने में नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए इसके प्रयोग को आसान बनाया है। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सार्क उपग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भारत मौसम विज्ञान विभाग वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी मौसम और जलवायु सेवाओं में आधुनिक तरीके से बदलाव करेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हाई रेजोल्यूशन मॉडल अपनाने के अलावा स्थानीय पूर्वानुमान तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन आधारित ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी की तैनाती और उसका उपयोग करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वानुमान और सूचना में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को समझने में आसान बनाया जाए और प्रत्येक नागरिक द्वारा आसानी से उपयोग किया जाएगा।

देश में मौसम रडारों की संख्या हुई 33
उन्होंने घोषणा की कि आज के उद्घाटन के साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग नेटवर्क में रडारों की संख्या 33 तक पहुंच गई है। उन्होंने आईएमडी से आग्रह किया कि वह अपने नियंत्रण में सभी संसाधनों यानी उपग्रहों, रडार, कंप्यूटर, उन्नत मॉडल और मानव संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करे। उन्होंने जनता के माध्यम से अवलोकनों को संग्रहित करने के लिए क्राउड जैसे नए मंच का उद्घाटन किया। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर, लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल, डॉ एम रविचंद्रन, डॉ के सिवान, डॉ एम महापात्रा, डॉ एस डी अत्री आदि उपस्थित रहे। 

विस्तार

लद्दाख के लेह समेत देशभर के चार स्थानों पर डॉपलर मौसम रडार शुक्रवार को राष्ट्र को समर्पित किए गए। केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने लेह, दिल्ली, मुंबई व चेन्नई में स्थापित इन रडार का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत ने दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों में मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करने के लिए एशियाई महाद्वीप में अग्रणी भूमिका निभाई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के 147वें स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि 2016 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई देशों को उपलब्ध कराई जा रही मौसम की गंभीर चेतावनी की जानकारी ने एक लंबा सफ र तय किया है। गंभीर जलवायु आपदाओं से लड़ने में नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए इसके प्रयोग को आसान बनाया है। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सार्क उपग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भारत मौसम विज्ञान विभाग वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी मौसम और जलवायु सेवाओं में आधुनिक तरीके से बदलाव करेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हाई रेजोल्यूशन मॉडल अपनाने के अलावा स्थानीय पूर्वानुमान तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन आधारित ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी की तैनाती और उसका उपयोग करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वानुमान और सूचना में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को समझने में आसान बनाया जाए और प्रत्येक नागरिक द्वारा आसानी से उपयोग किया जाएगा।

देश में मौसम रडारों की संख्या हुई 33

उन्होंने घोषणा की कि आज के उद्घाटन के साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग नेटवर्क में रडारों की संख्या 33 तक पहुंच गई है। उन्होंने आईएमडी से आग्रह किया कि वह अपने नियंत्रण में सभी संसाधनों यानी उपग्रहों, रडार, कंप्यूटर, उन्नत मॉडल और मानव संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करे। उन्होंने जनता के माध्यम से अवलोकनों को संग्रहित करने के लिए क्राउड जैसे नए मंच का उद्घाटन किया। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर, लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल, डॉ एम रविचंद्रन, डॉ के सिवान, डॉ एम महापात्रा, डॉ एस डी अत्री आदि उपस्थित रहे। 

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